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1. गोमती चक्र क्या है?
गोमती चक्र एक दुर्लभ और पवित्र शंख जैसा पत्थर है, जो मुख्यतः गुजरात की गोमती नदी में पाया जाता है।
यह प्राकृतिक रूप से बना हुआ होता है और इसके एक तरफ गोलाई होती है जबकि दूसरी तरफ घुमावदार सर्पिल (Spiral) आकार।
इसे श्री विष्णु चक्र या सुदर्शन चक्र का प्रतीक माना जाता है।
प्राकृतिक संरचना
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एक तरफ चमकदार और गोल, बिल्कुल शंख की तरह।
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दूसरी तरफ भंवरदार गोलाई, जो “अनंत चक्र” का प्रतीक है।
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रंग प्रायः सफेद, हल्का पीला, भूरा या क्रीम टोन में होता है।
2. धार्मिक महत्व
गोमती चक्र को विशेष रूप से भगवान विष्णु और देवी लक्ष्मी से जोड़ा गया है।
शास्त्रों के अनुसार, जो व्यक्ति इसे श्रद्धा से घर या तिजोरी में रखता है, उसके घर पर धन, सुख और समृद्धि का वास होता है।
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विष्णु का प्रतीक – इसे विष्णु के सुदर्शन चक्र का रूप माना जाता है, इसलिए यह नकारात्मक शक्तियों का नाश करता है।
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लक्ष्मी का आशीर्वाद – लक्ष्मी पूजा में गोमती चक्र का विशेष स्थान है।
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वास्तु और तंत्र प्रयोग – कई तांत्रिक साधनाओं और यंत्रों में इसका उपयोग होता है।
3. ज्योतिषीय महत्व
ज्योतिष के अनुसार, गोमती चक्र को ग्रह दोष शांति के लिए प्रयोग किया जाता है।
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शनि दोष निवारण – शनि की साढ़े साती और ढैय्या से राहत पाने के लिए गोमती चक्र का उपाय कारगर माना जाता है।
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राहु-केतु दोष – इन ग्रहों से उत्पन्न मानसिक अशांति और बाधाएँ दूर होती हैं।
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पितृ दोष शांति – गोमती चक्र को जल में प्रवाहित करने से पितरों की कृपा प्राप्त होती है।
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धन हानि से बचाव – तिजोरी या गल्ले में रखने से धन सुरक्षित रहता है और अचानक होने वाले नुकसान से बचाव होता है।
4. वास्तु शास्त्र में महत्व
वास्तु शास्त्र में गोमती चक्र को एक ऊर्जा संचारक (Energy Enhancer) माना गया है।
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घर की नकारात्मक ऊर्जा को दूर करता है।
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वास्तु दोष (जैसे गलत दिशा में दरवाजा, बीम के नीचे बैठना आदि) को कम करता है।
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उत्तर दिशा में रखने से धन और करियर में वृद्धि होती है।
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पूजा घर में रखने से पूरे घर में सकारात्मक ऊर्जा फैलती है।
5. गोमती चक्र के लाभ
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धन और समृद्धि – घर और दुकान में रखने से लक्ष्मी कृपा बनी रहती है।
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बुरी नजर से बचाव – बच्चों और परिवार को नजर दोष से सुरक्षा मिलती है।
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व्यापार में उन्नति – दुकान या ऑफिस में रखने से बिक्री और मुनाफा बढ़ता है।
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संतान सुख – निःसंतान दंपत्ति इसे प्रयोग में लाते हैं।
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शत्रु नाश – यह शत्रुओं और नकारात्मक शक्तियों से रक्षा करता है।
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मानसिक शांति – ध्यान और पूजा में उपयोग करने से मन शांत और स्थिर होता है।
6. गोमती चक्र रखने की विधि (Step by Step)
(A) घर की तिजोरी में
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11 या 21 गोमती चक्र लें।
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इन्हें लाल कपड़े या पीले कपड़े में बांध लें।
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तिजोरी या अलमारी में रखें।
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इससे धन वृद्धि होती है और तिजोरी हमेशा भरी रहती है।
(B) लक्ष्मी पूजन पर
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दीपावली, धनतेरस या अक्षय तृतीया पर 11 गोमती चक्र लें।
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इन्हें लक्ष्मी जी के सामने रखें और पूजन करें।
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पूजा के बाद इनमें से 5 चक्र तिजोरी में, 5 चक्र गल्ले में और 1 चक्र मंदिर में रखें।
(C) बुरी नजर दूर करने के लिए
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7 गोमती चक्र लेकर व्यक्ति के ऊपर से 7 बार उतारें।
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फिर इन्हें बहते जल (नदी) में प्रवाहित कर दें।
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इससे नजर दोष समाप्त हो जाता है।
(D) व्यापार में लाभ के लिए
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दुकान के गल्ले में 11 गोमती चक्र रखें।
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हर शुक्रवार को इसकी पूजा करें।
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इससे ग्राहक आकर्षित होते हैं और व्यापार बढ़ता है।
(E) ग्रह दोष शांति हेतु
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शनि दोष में शनिवार को काले कपड़े में 11 गोमती चक्र रखकर शनि मंदिर में अर्पित करें।
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राहु-केतु दोष में बुधवार को 7 गोमती चक्र जल में प्रवाहित करें।
7. गोमती चक्र से जुड़े विशेष उपाय
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धन आकर्षण – 5 गोमती चक्र पीले कपड़े में बांधकर उत्तर दिशा में रखें।
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घर की रक्षा – घर के मुख्य द्वार पर 11 गोमती चक्र रखकर पूजा करें।
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संतान सुख हेतु – 21 गोमती चक्र को दूध में धोकर मंदिर में अर्पित करें।
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विवाह में बाधा – 11 गोमती चक्र शुक्रवार को लाल कपड़े में बांधकर लक्ष्मी जी के चरणों में रखें और बाद में तिजोरी में रख लें।
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संपत्ति विवाद निवारण – मंगलवार को 11 गोमती चक्र हनुमान जी को अर्पित करें।
8. गोमती चक्र का आध्यात्मिक अर्थ
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गोल आकार – पूर्णता और अनंत ऊर्जा का प्रतीक।
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स्पाइरल डिज़ाइन – जीवन चक्र, जन्म-मरण और पुनर्जन्म का संकेत।
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सुदर्शन चक्र से समानता – बुराई का नाश और धर्म की रक्षा का प्रतीक।
इसका अर्थ है कि गोमती चक्र केवल भौतिक लाभ ही नहीं देता, बल्कि यह आत्मिक शक्ति और आध्यात्मिक संतुलन का भी स्रोत है।
9. गोमती चक्र से जुड़े मंत्र
गोमती चक्र रखते समय यह मंत्र बोलना शुभ होता है –
“ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं महालक्ष्म्यै नमः”
या
“ॐ नमो भगवते वासुदेवाय नमः”
इन मंत्रों के साथ गोमती चक्र की स्थापना करने से इसका प्रभाव और भी अधिक बढ़ जाता है।
10. निष्कर्ष
गोमती चक्र एक अद्भुत और दिव्य प्राकृतिक वस्तु है।
यह सिर्फ एक शंख का टुकड़ा नहीं, बल्कि समृद्धि, सुरक्षा, शांति और शक्ति का प्रतीक है।
घर, दुकान या पूजा में इसे रखने से –
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धन की वृद्धि,
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परिवार की सुख-शांति,
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व्यापार में तरक्की,
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और नकारात्मक शक्तियों से रक्षा होती है।
इसलिए शास्त्रों में इसे हर घर और हर व्यापारी के लिए अत्यंत शुभ और आवश्यक माना गया है।
